वैष्णो देवी मंदिर जाना पैसे की बरबादी, अजमेर शरीफ से कोई परहेज नहीं – अक्षय कुमार उर्फ आसिफ
फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार का कहना है कि अब उन्हें वैष्णो देवी मंदिर में जाना समय और पैसे की बरबादी लगता है। वर्ष 2012 में ओह माई गॉड (Oh My God) के प्रोमोशन के दौरान फिल्माए गए इस वीडियो में अक्षय कुमार उर्फ आसिफ कह रहे हैं कि एक समय में वे हर साल वैष्णो देवी (Vaishno Devi) की यात्रा करते थे।…

फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार का कहना है कि अब उन्हें वैष्णो देवी मंदिर में जाना समय और पैसे की बरबादी लगता है। वर्ष 2012 में ओह माई गॉड (Oh My God) के प्रोमोशन के दौरान फिल्माए गए इस वीडियो में अक्षय कुमार उर्फ आसिफ कह रहे हैं कि एक समय में वे हर साल वैष्णो देवी (Vaishno Devi) की यात्रा करते थे। उन्होंने बताया कि वे अमरनाथ (Amarnath) जैसे हिन्दू तीर्थ स्थलों में देवी-देवताओं के दर्शन के लिए लगातार जाते रहते थे। लेकिन “ओह माइ गॉड” फिल्म बनने के बाद उनका नज़रिया ही बदल गया है।
अब उन्हें वैष्णो देवी की यात्रा करना समय और पैसे दोनों ही की बरबादी लगता है। अक्षय का कहना है कि एक यात्रा में उनके तीन से चार लाख रुपए खर्च हो जाते हैं। क्योंकि उनके साथ उनका सुरक्षा दस्ता भी जाएगा और फिर उन्हें मंदिर में “चढ़ावा” भी चढ़ाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अब वे इस पैसे का “सदुपयोग” कर रहे हैं। वे इस पैसे को टाटा कैंसर हॉस्पिटल में जाकर मरीजों को दे देते हैं। अगर वे पाँच कैंसर मरीजों में 1-1 लाख रुपया बाँट देते हैं तो उन्हें घर बैठे भगवान के दर्शन हो जाते हैं और यही वजह है कि उन्होंने “ओह माइ गॉड” जैसी फिल्म का निर्माण किया है।
आपको बता दें कि ओह माइ गॉड फिल्म में अक्षय कुमार ने खुल कर हिन्दू देवी-देवताओं और परम्पराओं का मज़ाक उड़ाया है। ठीक वैसे ही जैसे भारत में डर के माहौल में रह रहे आमिर खान (Amir Khan) ने अपनी फिल्म पीके (PK) में हिन्दू धर्म का अपमान किया है।
O Hindus, When will you stop the harmful stupid sin of idol-worship and start offering Chaadar to Ajmer Sharif?
– Janaab @akshaykumar aka Asif in #Laxmii releasing 9 Nov 2020 pic.twitter.com/J2UfJ5VtYN
यही अक्षय कुमार 2013 में अपनी फिल्म Once Upon A Time in Mumbai Dobara के प्रमोशन के दौरान अजमेर शरीफ (Ajmer Sharif) में चादर चढ़ाने के लिए भीड़ में धक्के खा रहे थे। उस समय शायद अक्षय कुमार उर्फ आसिफ को यह ध्यान नहीं आया कि अपने लाव-लश्कर के साथ अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाने में उनके लगभग 10-12 लाख रुपए खर्च हुए ही होंगे क्योंकि इस बार वे अकेले नहीं थे। इस बार उनके साथ शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी और बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा भी थीं।
इस बार अक्षय कुमार भूल गए कि अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाने के लिए खर्च किए पैसे से न जाने कितने गरीबों का भला हो सकता था। न जाने कितने कैंसर के मरीजों के इलाज में सहायता की जा सकती थी और सैंकड़ों बच्चों को महीने भर के लिए दूध और रोटी का इंतजाम किया जा सकता था।
इन्हीं अक्षय कुमार और इन जैसे न जाने कितने लोगों की फिल्मों पर हिंदु भाई-बहन हर महीने सैकड़ों रुपए बर्बाद कर इन्हें सुपर स्टार बनाते हैं। यह पहला मौका नहीं है जब अक्षय कुमार अपनी फिल्मों के माध्यम से या कर्मों से हिन्दू धर्म, देवी-देवताओं और परम्पराओं का मज़ाक उड़ा रहे हैं। फिल्मी सितारों और टीवी सीरियल में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से की जा रही धर्म और भारतीय परम्पराओं को उजागर करने के उद्देश्य से ही हमने Gems of Bollywood की शुरुआत की है।
